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सोमवार, मई 03, 2010

(कविता)-आंसू


 
ये आंसू है इसे बहने दो
ये दर्द बहा  ले जाएगा
वैसे भी दर्द तो दरिया है
गर ठहरा तो सड़ जाएगा

ये आंसू  है इसे रहने दो
ये वक्त पड़े काम आएगा
जब रिश्ते रेत हो जाएंगे
उस वक्त नमी दे जाएगा

ये आंसू है इसे कहने दो
ये बातें कई कह जाएगा
कह न सके जो शब्द कभी
ये वो सब भी कह जाएगा


                            - अशोक जमनानी

 
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