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मंगलवार, मई 11, 2010

(नई रचना) -देस राग

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चूल्हे ठंडे पड़े और पेट में आग है
वाह वाह कहो न यही देस राग है


न्याय धीमा है तो ऐसा ही चलने दो
हमपे हैं कई केस हम कहां बेदाग हैं


संसद स्थगित हुई चलो आराम करें
हंगामा करने में भी हुई दौड़ भाग है


सिपाही मारे गए हैं!नक्सली भाग गए
जंगल में लड़ाई दिल्ली में दिमाग है
 
समाचार प्रायोजित हैं हमको मालूम है
विज्ञापन न मिलें जब लिखा बेलाग हैं


शायर बिक गया चलो ये अच्छा हुआ
अब देखे कि लगाता कैसे वो आग है


यही देस राग है - यही देस राग है

                    - अशोक जमनानी


 
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