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गुरुवार, मई 13, 2010

(ग़ज़ल)-शायद

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मेरी ही तरह उदास हो शायद
बीते लम्हों के साथ हो शायद

कोई बातें वफ़ा की करता हो
झील वो पानी पानी हो शायद

उसकी छत पे मेरी छत जैसा
आसमान आसमानी हो शायद

रात भर बीता वक्त पढ़ना हो
नींद सुबह बुलानी हो शायद

टूटे ख्वाबों के कोयले लेकर
दिल अंगीठी जलानी हो शायद

                 - अशोक जमनानी
 
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