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रविवार, मई 16, 2010

(गीत) -बंधन


तू बांधने चला मुझे मैं बंध न पाऊंगा
है प्रीत की ये रीत मैं कैसे निभाऊंगा

बादलों से जो गिरी वो पहली बूँद मैं
गिरके खो जाऊं कहां कैसे बताऊंगा

सूर्य की पहली किरण भोर का परिचय
जग को रोशनी  की सौगात दे जाऊंगा

जो उठी तेरे हृदय वो पहली पीर मैं
तुम भूलना मुझे तुम्हें मैं याद आऊंगा


                                                          - अशोक जमनानी
 
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