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रविवार, मई 23, 2010

पचमढ़ी में शरद जोशी-हरिशंकर परसाई प्रसंग

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अशोक जमानानी का स्वागत  करते हुए श्री त्रिभुवन नाथ शुक्ला
                        सतपुड़ा पर्वत श्रंखला पर  प्रकृति की अद्भुत छटा समेटे बसी हुई खूबसूरत हिल स्टेशन पचमढ़ी में 21 एवं 22 मई को साहित्य अकादमी ,मध्य प्रदेश के आयोजन में दो दिनों तक हिन्दी साहित्य की दो महान विभूतियों श्री शरद जोशी एवं श्री हरिशंकर परसाई के साहित्यिक अवदान पर आयोजित कार्यक्रम में मुझे भी भाग लेने का अवसर मिला। हिन्दी व्यंग्य पर हुए इस दो दिवसीय विमर्श का विषय समय एवं समाज: संदर्भ शरद जोशी एवं हरिशंकर परसाई था। दो दिवसीय इस आयोजन का शुभारंभ साहित्य अकादमी के निदेशक श्री त्रिभुवन नाथ शुक्ला के व्याख्यान से हुआ। इस कार्यक्रम में डॉ. उषा शाजापुरकर डॉ.प्रमोद शर्मा डॉ. पुष्पा रानी श्री जगदीश तोमर डॉ.के.जी.मिश्रा डॉ. निलय गोस्वामी एवं मैने अपने व्याख्यान प्रस्तुत किए। साहित्य के साथ-साथ प्रकृति का सानिध्य सभी के लिए एक अविस्मरणीय अनुभव रहा।
                                                                                                                 -अशोक  जमनानी   
 
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