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बुधवार, मई 26, 2010

लघु कथा: राजमार्ग


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पुरानी सड़क जिसे बस इसलिए सड़क कहा जाता था क्योंकि सरकारी रिकार्ड में वो सड़क के रूप में दर्ज थी। गढ्ढे इतने अधिक थे कि लोग बीस किलोमीटर के फेर वाला लम्बा रास्ता अपनाते थे पर उस सड़क से तो कोई भूलकर भी नहीं निकलता था। सड़क से ही लगा हुआ एक छोटा सा गांव था जिसके सारे कुत्ते दिनभर तो गांव की गलियों में घूमते थे और रात होते ही सड़क पर आ जाते थे। जिस सड़क से दिन में कोई नहीं निकलता था- वहां रात में कौन जाता- बस कुत्तों का एकछत्र साम्राज्य था। रात भर मनमाने ढंग से मस्ती करते और बेफ्रिक होकर भौंकते रहते। 
                    
 कहते हैं न कि बारह साल में घूरे के दिन भी फिरते हैं तो वही हुआ। स्थानीय सांसद के अथक प्रयास सफल हुए और वो सड़क राष्ट्रीय राजमार्ग घोषित हो गई। कुछ महीनों बाद ही वहां फोरलेन रास्ता तैयार हुआ और जिस दिन से आवागमन शुरू हुआ उसी दिन से गाड़ियों का पूरा मेला वहां से गुजरने लगा एक से एक खूबसूरत और महंगी गाड़ियां वहां से जाने लगीं। गांव के कुत्ते उस रात भी वहां पहुंचे लेकिन गाड़ियों की भीड़ देखकर सहम गए। एक नौज़वान कुत्ते ने कहा कि इस सड़क पर हमारा जन्म-सिद्ध अधिकार है। बाकी कुत्तों ने उसे बहुत समझाया पहले तो वो मान गया लेकिन फिर उसने देखा कि राजमार्ग से गुजरती हुई एक आलीशान  गाड़ी में से एक कुत्ता बाहर झांक रहा है और जोर जोर से भौंक रहा है साथ ही उसने देखा कि कुछ लाल बत्ती वाली गाड़ियों में भी कुत्ते सवार हैं और वो भी पूरी आज़ादी के साथ भौंक रहे हैं। यह देखकर उसका मन मचल गया और वो राजमार्ग पर जाकर जोर-जोर से भौंकने लगा। थोड़ी ही देर में एक आलीशान गाड़ी वहां से गुजरी और कुत्ते को कुचलते हुए चली गयी। मरते समय नौज़वान कुत्ते ने यही कहा कि हमारा हक बस टूटी-फूटी सड़क पर है। राजमार्ग बनते ही उस पर आलीशान गाड़ियों का हक स्थापित हो जाता है और भूलकर भी कभी राजमार्ग पर कभी मत भौंकना वरना कुचल दिए जाओगे। राष्ट्रीय राजमार्ग पर बस वही कुत्ते भौंक सकते हैं जो खास गाड़ियों में सवार हैं।


                                        -                                             अशोक जमनानी
 
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