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शुक्रवार, मई 28, 2010

गजल- बादल


बादल हैं आसमान में पानी लिए हुए
मिटेंगे पहले इनकी उड़ान तो देखो

टूटते तारों का गिरना है सच मगर
टूटने वालों की रोशन शान तो देखो

दो रोटियों के बदले आसीसता जहां
कंगाल से फकीर का ईमान तो देखो

लुटकर निभाता है साथ कहकहों का
लुटे हुए का कीमती सामान तो देखो

महल देखते हो पत्थरों के तुम बहुत
छोटा कोई  दिल का मकान तो देखो

                       - अशोक जमनानी
 
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