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रविवार, मई 30, 2010

गीत:ओ पथिक तू चल अकेला

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ओ पथिक तू चल अकेला कारवां बन जायेगा
जीवन समर को कर समर्पित तू अमर हो जायेगा


ना आंसुओं का अर्ध्य  हो न पीर की परवाह हो
यश की कोई कामना ना पथ में शीतल छांव हो
तू नींव के पत्थर को अपनी आस्था का दान दे
निर्माण का हर कंगूरा तुझसे ही जीवन पायेगा


यह तम नहीं तेरा पता ना तेरा परिचय मौन है
आके तमस को चीर दे वो पहली रश्मि कौन है
अज्ञान की आंधी में भी तू ज्ञान के दीपक जला
यह गहन होगा दहन जग उजियारा हो जायेगा

संघर्ष की अपनी सीमाएं तू अतुलित बल का स्वामी है
सब बाधाओं ने ओ साथी आखिर तो हार ही मानी है
तू सत्य ग्रहण कर
साहस को संग ले
कर श्रद्धा अर्पित
विश्वास का रंग ले
इस देव भूमि भारत पर तेरा जन्म सफल हो जायेगा
जीवन समर को कर समर्पित तू अमर हो जायेगा

-अशोक जमनानी
 
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