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मंगलवार, जून 01, 2010

ग़ज़ल: दोस्त

 सुना है मेरा दिल दुखाएगा
दोस्त है दोस्ती निभाएगा

वो आंखों में शर्म रखता है
सिर झुकाकर ही कतराएगा

भीड़ में वो एहसान कर देगा
नज़रें मिलीं; तो मुस्कराएगा

दर्द का मेरा जब सफ़र होगा
अलविदा कहने ही वो आएगा

याद रखना वो कहेगा मुझे
और वो मुझको भूल जाएगा

       - अशोक जमनानी
 
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