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रविवार, नवंबर 07, 2010

व्यास-गादी:यम द्वितीया और यमुना



मैंने अपने उपन्यास व्यास-गादी के लेखन के दौरान कुछ समय ब्रज क्षेत्र में बिताया। कहानी का अधिकांश भाग ब्रज में ही घटित होता है इसलिए यह आवश्यक भी था और मैं स्वयं भी वहां रहकर आंनदित ही था। आज यम द्वितीया है जिसे हम भाई-दूज के रूप में अधिक जानते हैं। भाई-बहन के इस पावन पर्व की पौराणिक मान्यता की पतित पावनी प्रतीक हैं- यमुना जी और मान्यता यह है कि यम एवं यमुना दोनों जुड़वा भाई-बहन हैं। कहते हैं कि यमुना जी ने एक बार अपने भाई यम को आमंत्रित किया और अपने स्वागत सत्कार से प्रसन्न होकर यम ने कहा कि कोई वरदान मांग लो तब यमुना जी ने यह वरदान मांगा कि आज के दिन उनके जल में स्नान करने वाले को सभी दुःखों से मुक्ति मिल जाये। यम ने उन्हें यह वरदान दिया और आज भी ब्रज क्षेत्र में इस दिन यमुना-स्नान का विशेष महत्व है।

स्नान का विशेष महत्व और पर्व का सर्वव्यापी प्रभाव तो हमें याद रहा लेकिन एक बात हम भूल गए कि हमें दुःखों से मुक्ति का वरदान मांगने वाली यमुना जी के प्रति भी हमारे कुछ कर्Ÿाव्य हैं। विकास की अंधी दौड़ में हमने हमारी प्रकृति को अपूरणीय क्षति पहुंचायी है और हमारी सभी पवित्र नदियां धीरे-धीरे गटर में तब्दील होती जा रहीं हैं। मैं नर्मदा के किनारे बसे शहर में रहता हूं और उसे भी मेरा शहर गटर में तब्दील कर रहा है। लेकिन आज मैं ब्रज क्षेत्र के सर्वाधिक पावन स्थान वृंदावन में यमुना में मिल रहे नालों की तस्वीरें इसलिए दिखाना चाहता हूं क्योंकि मैं अपने धर्म-प्रेमी समाज से यह जानना चाहता हूं कि जिस यमुना के सर्व दुःख हर्ता वरदान के कारण हम आज का त्यौहार मना रहे हैं उस यमुना को दुःखों से मुक्ति आखिर कब मिलेगी??????????? 
 
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