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शुक्रवार, मई 04, 2012

हरि शंकर परसाई स्मृति समारोह,बरेली


शरद जोशी - हरिशंकर परसाई स्मृति समारोह


साहित्य अकादमी मध्य प्रदेश के द्वारा शरद जोशी-हरि शंकर परसाई स्मृति समारोह मध्य प्रदेश के एक बहुत छोटे से कस्बे - बरेली में कुछ माह पूर्व आयोजित किया गया था. बहुधा साहित्यिक आयोजनों में लोगों कि उपस्थिति कम ही रहती है और आयोजन छोटे से कस्बे में हो तो यह संख्या और भी कम हो जाती है . जैसी उम्मीद थी वैसा ही हुआ और कार्यक्रम में बहुत कम लोग आये. लेकिन जितने भी लोग आये वो सभी गहरी सहित्यिक अभिरुचि संपन्न जन थे. उन्होंने पूरे मनोयोग से वक्ताओं को सुना और कार्यक्रम के बाद मुझसे मेरी किताबें भी मांगीं. मुझे आश्चर्य चकित करते हुए कुछ ही दिनों में आधिकांश लोगों ने मुझे पत्र लिखे जो एक ओर तो उनके स्नेह से भरे हुए थे वहीँ दूसरी ओर उनमे मेरी किताबों की अत्यंत बौद्धिक समीक्षा भी समाहित थी.


वे सभी पत्र मेरे लिए अमूल्य हैं लेकिन सबसे अधिक महत्वपूर्ण है बहुत छोटे -छोटे कस्बों ओर गाँवों  में सहित्यिक अभिरुचि संपन्न लोगों का मौजूद होना. बड़े शहरों के अधिकांश पाठक संभवतः किसी कृति के साथ वैसा आत्मीय न्याय नहीं कर पाते जैसा छोटे-छोटे कस्बों और गाँवों  के पाठक करते हैं. शायद बड़े शहरों के लोगों के पास इतना वक़्त ही नहीं है कि किसी कृति को पूरे मनोयोग से पढ़कर उसके बारे में लेखक को लम्बा सा पत्र लिखें. अधिकांश शहरी पाठक या तो मुझे फोन  करते हैं या फिर छोटा सा इ-मेल भेजते हैं. पाठकों के अधिकांश पत्र छोटे कस्बों या छोटे शहरों से ही आते हैं. साहित्य अकादमी के इस प्रयास ने मेरे उस विश्वास को पुष्ट ही किया जो हमेशा मुझसे कहता है.


इन्सान एक भी न हो और भीड़ बहुत हो
जन्नत हो वो जगह पर मुझको खुदा न दे
 
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