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मंगलवार, अगस्त 28, 2012

राजस्थान-यात्रा-१३-सम-१-





खम्मा लेखन हेतु राजस्थान-यात्रा-सम  

जहां तक नज़र जाये वहां तक फैले धोरे-टीलों में रेत का अनंत विस्तार समेटे विषम धरती पर इस स्थान का नाम है-सम। वास्तव में यहाँ आकर ही आप रेगिस्तान के निर्लिप्त सौन्दर्य से रूबरू होते है। जब रेत के विस्तार में रेत के अतिरिक्त कुछ दिखाई नहीं देता तब जाकर ही रेगिस्तान का अर्थ समझ में आता है और तभी समझ में आतीं हैं वो विषम परिस्थितियां जिनका सामना यहाँ का जीवन करता है। लेकिन कैसी भी विपरीत परिस्थितियां हों मनुष्य कोई न कोई मार्ग खोज ही लेता है। कभी इस  रेगिस्तान से न जाने कितने कारवां गुज़रते थे और ये एक प्रमुख व्यापारिक मार्ग था। अब वो कारवां नहीं हैं पर उन कारवां को ले जाने वाले  ऊंट आज भी पर्यटकों को उस यात्रा का अहसास कराने के लिए मौजूद हैं। सम पहुँचते ही कई बच्चे और बड़े आपको घेर लेते हैं और जब तक आप ऊंट की सवारी के लिए तैयार न हो जाये वो पीछा नहीं छोड़ते। किसी टीले के बिल्कुल किनारे पर चलता ऊंट और टीले की सरकती रेत किसी पहली बार के सवार को जिस रोमांच का एहसास कराती है उसे महसूस करने के लिए तो आपको सम ही जाना पड़ेगा। पर आप सम जाएँ तो शाम को डूबता सूरज जरूर देखिएगा क्योंकि सूरज वहां आसमान में नहीं डूबता सूरज वहां रेत में डूबता है ..............

- अशोक जमनानी
  


 
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