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सोमवार, सितंबर 24, 2012

राजस्थान-यात्रा-22-ओसियां

राजस्थान-यात्रा-ओसियां

ओसियां जिसका एक पुराना नाम उपकेशपट्टन भी  है ओसवालों के इतिहास का पहला अध्याय है। यहाँ स्थित सच्चिका माता या सच्चियाय माता का मंदिर हिन्दुओं और ओसवालों दोनों की श्रद्धा का केंद्र है। साथ ही बहुत खूबसूरत शिल्प को संजोये जैन मंदिर भी श्रद्धा के साथ-साथ कला-प्रेमियों के भी आकर्षण का केंद्र हैं। सच्चिका माता मंदिर जिस पहाड़ी पर स्थित है वहां तक जाने वाले मार्ग में सीढ़ियों के साथ बने तोरणों की एक लम्बी श्रंखला बरबस ही जाने वालों का मन मोह लेती है। मंदिर का अपना शिल्प भी अद्भुत है और कलात्मक स्तम्भ और   देवालय भी दर्शनीय हैं।वैसे मंदिर में  श्रद्धालुओं  की अनवरत श्रंखला ठहरकर शिल्प निहारने की इज़ाज़त नहीं देती और न ही मंदिर में श्रद्धालुओं की सुविधा के नाम पर किया गया खिलवाड़ भी कोई ख़ुशी देता है। भारत ही एक ऐसा देश है जिसने संस्कृति को परिभाषित करते हुए सत्य और शिव के साथ सुन्दर भी जोड़ा। भारतीयों का सौंदर्य-बोध अत्यंत उच्च श्रेणी का रहा है और जहाँ भी अवसर मिला इसका समुचित प्रकाट्य भी हुआ है। हमारे प्राचीन मंदिर तो शिल्प के जिस अद्भुत सौन्दर्य को समेटे हुए हैं उसे देखने तो पूरी दुनियां से लोग आते हैं। लेकिन अब न जाने हमारा वो सौन्दर्य-बोध कहाँ लुप्त हो गया है। अत्यंत कलात्मक कृतियों के साथ हम जो अविवेकी आचरण करते हैं वो तो हमारे सारे किये कराये पर पानी फेर देता है। सच्चिका माता मंदिर में भी श्रद्धालुओं को धूप-पानी से बचने के लिए प्लास्टिक के बेहद भद्दे शेड बनाये गए हैं जो शिल्प के  समस्त कलात्मक सौन्दर्य की लगभग हत्या कर देते हैं। ऐसे प्रयोग केवल यहीं नहीं किये गए हैं वरन सारे  देश का यही हाल है। पता नहीं क्यों ऐसे स्थानों पर प्रबंध करने वालों में एक भी ऐसा व्यक्ति कभी शामिल नहीं किया जाता जो ऐसी व्यवस्था बनाये जिसमें  लोगों को सुविधा तो मिले लेकिन कलात्मक सौन्दर्य का  मखमल  बेवज़ह टाट का पैबंद लगने से भी बच जाये। श्रद्धा धर्म से जुड़ी है और कलात्मकता  संस्कृति से लेकिन दोनों में एक अद्भुत जुड़ाव है और दोनों  को इस देश में  एक साथ जन-जन के जीवन से जुड़ाव की भी जो सामर्थ्य प्राप्त है वो पूरी दुनियां के लिए एक मिसाल है। कोशिश होनी चाहिए जहाँ धर्म के साथ कलात्मक सौन्दर्य के प्रतीक भी मौजूद हैं उनके प्रबंधन में अविवेकी आचरण से बचा जाये वरना हो सकता है एक दिन टाट के पैबंद पूरे मखमल को ही ढक लें !!!!!!!!!!
- अशोक जमनानी           
 
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