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सोमवार, सितंबर 17, 2012

राजस्थान-यात्रा- १८ - मेहरानगढ़






खम्मा लेखन हेतु राजस्थान-यात्रा- मेहरानगढ़
जोधपुर की पहचान  के रूप में विश्व-विख्यात किले मेहरानगढ़ के बारे में कभी रुडयार्ड किप्लिंग ने कहा था " यह दुर्ग फरिश्तों और देवताओं द्वारा निर्मित लगता है ............. ." यह बात अतिशयोक्तिपूर्ण नहीं लगती जब आप मेहरानगढ़ से रूबरू होते हैं. चिड़ियाटूंक पहाड़ी पर बने इस खूबसूरत किले का स्थापत्य किसी की भी दृष्टि को बांधने की अचूक सामर्थ्य रखता है और किले के भीतर बने महल,मंदिर, संग्रहालय और पांडुलिपियों को सहेजे पुस्तकालय सभी को कोई न कोई वजह दे ही देते हैं जिसके कारण आगंतुक देर तक वहां रुकने के लिए लगभग विवश हो उठते हैं. मुझे चिड़िया नाथ जी का वो स्थान देखना था जहां कभी उनकी धूनी जलती थी और किला बनाने के लिए जब उसे हटाया गया तो उन्होंने राठौड़ो की फौज से कहा तुम बांकी फौज हो और आज भी उस संन्यासी  का उलहाना राठौड़ों  को रणबांका राठौड़ का ख़िताब दिलाये हुए है. कहते हैं उन्होंने कुछ श्राप भी दिए थे जो आज भी अपना थोड़ा बहुत असर दिखाते हैं. पर मुझे तो उस सन्यासी के रहने की जगह देखनी थी इसलिए मैं बड़ा-सा मैदान पार करके वहां पहुंचा तो मेरे अतिरिक्त वहां और कोई भी नहीं था . किले की पर्यटकों से भरी दमघोंटू चहल-पहल से बिल्कुल विपरीत वहां शांति का साम्राज्य था. किले का वैभव अद्भुत मगर उसमे आभिजात्य का अहंकार , सन्यासी की स्मृति वैभव विहीन परन्तु शान्ति का अखंड साम्राज्य . मैं देर तक वहां रुका रहा फिर किले में लौटा तो आँखें उस वीर की स्मृति को समर्पित किसी स्थान को ढूँढने लगीं जिसका नाम था- राजाराम और जिसने अपने आपको किले की नींव में इसलिए जिन्दा चुनवा दिया क्योंकि यह मान्यता थी कि  किले की नींव में जिन्दा व्यक्ति चुनवाया जायेगा तो किला अजेय हो जायेगा. पूरे किले में मुझे उस महान वीर का कोई स्मारक नहीं मिला जो हँसते-हँसते इसलिए नींव के पत्थरों में शामिल हो गया ताकि उसके राष्ट्र का वैभव अजेय रहे. सम्राटों के पास  उसकी स्मृति को किले में स्थान देने का  शायद कोई कारण नहीं रहा होगा पर मैं उस अपराजेय वीरता की  उपेक्षा से बहुत दुखी होकर लौट ही रहा था कि तभी मुझे रुडयार्ड किप्लिंग की बात याद आयी कि यह किला देवताओं और फरिश्तों का बनाया लगता है. न जाने क्यों मुझे पक्का यकीन हो चला कि जब रुडयार्ड किप्लिंग ने यह बात कही होगी तो उनके मन में जिस फ़रिश्ते का चित्र उभरा होगा वो किसी सम्राट का नहीं होगा बल्कि  अपने राष्ट्र को अपराजेय बनाने के लिए हँसते-हँसते किले की नींव का पत्थर बन जाने वाले राजाराम का होगा .
- अशोक जमनानी




 
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