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मंगलवार, अक्तूबर 02, 2012

श्रद्धांजलि

श्रद्धांजलि

चलो चिल्लाते हुए बात करें
शांति की
खंज़र पर लगा हुआ
रक्त लेकर लिखें
अहिंसा
किसी बेबस दलित कन्या को
माध्यम बनाकर दूर करें
अस्पृश्यता
सीना ठोककर स्वीकार करें घोटालों को
ताकि स्थापित हो
सत्य
और हाँ !
बोतल लेकर जरूर रख लेना आज ही 
कल बंद रहेगी दुकान
किसी गाँधी के कारण ......

-अशोक जमनानी
 
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