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सोमवार, अक्तूबर 22, 2012

वध कर



 वध कर

वध कर 
वध कर 
वध कर 
हे राम 
दशानन 
वध कर 
घनघोर गहन
तम पूजित
निर्लज्ज
भाव से वन्दित
है मर्यादा पथ
खंडित
हुआ असुर आचरण 
मंडित
हर  वैदेही फिर
बंदित
शुभ-पंथ-प्रयाण
है  शंकित
धर
अस्त्र-शस्त्र
अभिमंत्रित  
जन सैन्य प्रबल
संग सध कर
अब
वध कर
वध कर
वध कर
हे राम
दशानन
वध कर

- अशोक जमनानी
 
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