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बुधवार, अक्तूबर 31, 2012

डब्बा



डब्बा

छोटा-सा शिवांश 
सर  पर  
घड़ी दो घड़ी 
एक  
खाली डब्बा साध कर 
सोचता है 
उसने कुछ 
कमाल कर दिया 
और मुल्क मेरा 
साधता है 
पांच -पांच साल तक 
डब्बे कई बेकार 
और सोचता है 
उसने कुछ 
कमाल कर दिया  

- अशोक जमनानी 


 
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