Loading...
सोमवार, अक्तूबर 08, 2012

युवा-उत्सव

युवा-उत्सव

शनिवार को स्थानीय महा विद्धयालय में जिला स्तरीय युवा-उत्सव के निर्णायक के रूप में आमंत्रित किया गया। दो बहुत ही बेकार नाटक देखने के बाद मन बहुत खिन्न था परन्तु निर्णय तो देना ही था इसलिए कर्तव्य की इतिश्री के बाद मैंने प्रभारी प्राध्यापकों से सपाट लहजे मैं कह दिया कि वो जो नाटक लेकर आएं हैं वो निहायत ही घटिया हैं। मेरे एक मित्र ने यह कहते हुए मेरी बात का ज़ोरदार विरोध किया कि जब लोगों ने नाटक में रूचि लेना ही छोड़ दिया हो तब भी अगर कोई उसमें भाग लेता है तो उसकी तारीफ़ होनी चाहिए न कि आलोचना। 

मैंने उनसे कहा कि अगर चुनाव से अच्छे प्रत्याशी दूर रहें और केवल गुंडे मैदान में हों तो हमें क्या करना चाहिए ? उन्होंने कहा "लोकतंत्र की रक्षा के लिए एक गुंडे को चुन लेना चाहिए नहीं तो डिक्टेटरशिप आ जाएगी।" उनका जवाब सही था या गलत पर एक सवाल तब से मेरे ज़ेहन में है कि क्या हर क्षेत्र में सुपात्र की अनुपस्थिति हमें अपात्र या कुपात्र को चुनने के लिए इसलिए विवश कर देगी क्योंकि किसी को न चुनने की स्थिति में रिक्तता किसी बड़े खतरे को जन्म दे सकती है? मुझे जवाब मिला नहीं है ....
आप क्या कहते हैं ????  

- अशोक जमनानी     
 
TOP