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रविवार, नवंबर 18, 2012

आग

आग 

चलो उस  दरख़्त के नीचे
रख दें आग
और जल जाने दें उसे
धू-धू
जिस दरख़्त के नीचे
कुछ लोग 
सियासत वाले
चाहते हैं बैठना
दरख़्त
इज्ज़त के साथ जिया है
ताउम्र 
और नहीं चाहता
मरना
तिल-तिल
घुट-घुट कर

- अशोक जमनानी 
 
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