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शुक्रवार, नवंबर 30, 2012

माई-बाप

माई-बाप


वे कवि सम्मेलनों के माई-बाप हैं।
हमने गुज़ारिश की
"मालिक हमको भी मौका दिलवाइये।"
वो बोले "योग्यता बताओ"
हमने कहा कि तीन सौ कविताएं हैं
वो बोले " और चुटकुले?"
हमने कहा " तीन "
 वो बोले " तुम्हारा भविष्य अन्धकार में डूब चुका, निकालना है तो मामला पलट दो कविताएं तीन हों और चुटकुले तीन सौ, तो राष्ट्रीय स्तर पर ला सकता हूँ वरना जीवन भर लिखते रहो  ......
..... फेस बुक पर .... " 

- अशोक जमनानी
 
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