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शनिवार, दिसंबर 29, 2012

डर

डर  

नपुंसक सरकारें डरतीं हैं 
आंसुओं से
नपुंसक सरकारें डरतीं हैं 
मौन से
नपुंसक सरकारें डरतीं हैं   
दर्द से
नपुंसक सरकारें डरतीं हैं 
आवाज़ से
नपुंसक सरकारें डरतीं हैं  
मातम से
नपुंसक सरकारें डरतीं हैं 
विचार से
नपुंसक सरकारें डरतीं हैं 
सत्य से
इसीलिए
नपुंसक सरकारें
नज़र आतीं हैं
साथ खड़ी हुई
नपुंसकता के .............

-  अशोक जमनानी 

 
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