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बुधवार, मार्च 13, 2013

मैं नदी

मैं नदी


सत्ता लोलुप
हे राजवंश 
मैं नदी
अब 
जल विहीन
कृष्ण वाली
अस्मिता
आज लज्जित
हूँ बहुत
देखकर  
निर्लज्जता 
कालिय वंश
अनुगामी
विषधर  
हे राजवंश
हे प्रजा समस्त
मैं नदी 
पानी-पानी
कंदुक क्रीडा
प्रतीक्षारत
अंध युग की
विकल व्यथा
शापित किन्तु
मैं लिखूंगी
धिक्कार कहती
तेरी कथा


-अशोक जमनानी


 
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