Loading...
मंगलवार, मार्च 05, 2013

रक्त

रक्त 

अभी लगेगा बहुत वक़्त  
सूखने में ये रक्त
रक्त
जिसे बहाया था
तुम्हारी और मेरी
तलवारों ने 
रक्त
जो बहा था 
तुम्हारी और मेरी
कटी हुई गर्दनों  से
रक्त
जिसे देखकर
बेहोश हो गयीं थीं माँएं 
बिलख उठीं थीं
सिर पर पल्लू रखना भूलकर
घरों की चारदीवारियों में क़ैद
बेबस औरतें
और न जाने कितनी घुटन हुई थी
उन्हें भी
जिनके सपनों में थे हम
वो तो रो भी नहीं सकतीं थीं
और बूढ़े होते पिता
बस ज़रा से छोटे-बड़े भाई
और ... और दोस्त
जो लगते थे अपने बदन का हिस्सा
कितने खामोश थे
वो सब
लगा जैसे मर  गयीं थीं
उन सबकी आवाज़ें
और हाँ बच्चे भी तो थे
जो सहम गए थे
बहुत-बहुत
देखकर रक्त
रक्त
जिसे बहाया था
तुम्हारी और मेरी
तलवारों ने
जो बहा था
तुम्हारी और मेरी
कटी हुई गर्दनों से
रक्त
जो बहते ही
लगता है
सूखा-सूखा
लेकिन
जिसे लगता है
बहुत बहुत वक़्त
सूखने में ......
 
- अशोक जमनानी


 
TOP