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सोमवार, जून 24, 2013

पहाड़ और नदी





पहाड़ और नदी 



न जाने कितनी बार मैंने
दर्द लिखा
उम्र के पन्नों पर
न जाने कितनी बार
दर्द लिखा
तुमने भी
हम दोनों
पहाड़ और नदी की तरह
क्यों रो पड़ते हैं
कभी-कभी
कहकहों के बीच में ....

- अशोक जमनानी





 
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