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बुधवार, जुलाई 17, 2013

वो बच्चे

वो बच्चे


वो  बच्चे
सोये नहीं रात भर
सोते तो हैं वो बच्चे
खिलौने होते हैं
जिनके ख़्वाबों में
कुछ निवाले
पाने की उम्मीद
ख़्वाब बनने से
इंकार करती है अक्सर
पर किसी सुबह
मिले हुए चंद खैराती निवालों को
ठीक से देख भी नहीं पातीं आँखें
पेट तक पहुंचाने की हड़बड़ी में 
फ़िर 
सरकारें बांटती हैं मुआवज़ा 
सड़कें देखतीं  हैं तमाशा
ख़बरची बटोरते हैं बिकाऊ माल
आह भरते हैं 
ख़्वाब देखने वाले बच्चों के माँ-बाप 
हम परोसते हैं कविताएँ 
पर उस वक़्त 
भूख नहीं रहती बाकी
तो सो रहे होते हैं 
हमेशा के लिए 
बेजान खिलौनों की तरह 
वो ...... बच्चे ........ 
- अशोक जमनानी




 




 
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