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रविवार, अगस्त 25, 2013

कविता : नर्मदा लौट गयी




कविता : नर्मदा लौट गयी


नर्मदा लौट गयी
नर्मदा अपने तटबंधों के मध्य
नदी ने राह पकड़ ली पुरानी
तो शहर सुकून महसूसता है
पूजन पाठ शुरू हो गए वैसे ही
गंदे नाले चल पड़े मिलने जैसे के तैसे ही
कुछ दिनों का बदलाव
कितना परेशान कर गया
वैसे भी कहाँ सहन कर पाते हैं लोग
तटबंध तोड़कर विस्तारित होना
नदी का …
नारी का …….

- अशोक जमनानी





 
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