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मंगलवार, नवंबर 25, 2014

नर्मदा यात्रा : 5 : सिवनी संगम






नर्मदा यात्रा : 5 : सिवनी संगम

















पकरीसोढ़ा से आगे बढ़ते हैं तो कुछ मील बाद आता है - सिवनी संगम . यहाँ सिवनी नदी नर्मदा में आकर मिलती है और साथ ही नर्मदा के किनारों पर रेत मिलने के सिलसिले की भी शुरुआत होती है अर्थात नर्मदा के किनारे वैध-अवैध  खनन के लिए संसाधन यहीं से बनते हैं।  पास ही एक धर्मशाला है जो उस बच्चे के परिवार ने बनवायी है जो अपने छोटे भाई की  जान बचाने के लिए नर्मदा में कूदा और छोटे भाई को तो बचा लिया  लेकिन अपनी जान नहीं बचा पाया। नर्मदा की कुल लम्बाई 1312 किलोमीटर है और पूरी की पूरी नर्मदा में 46 मीटर चौड़ी बसाल्ट की चट्टानों की एक अखंड पट्टी है। जिसके कारण नर्मदा के तल में ऐसी सरंचनाएं हैं जो कहीं कहीं गहरे कुण्ड बनातीं हैं और बड़े से बड़ा गोताखोर भी यहाँ धोखा खा सकता है। इसलिए नर्मदा का प्रवाह अबूझ है।  इसी अबूझ प्रवाह में कुछ वर्ष पूर्व 14 साल का बेहद सुंदर ऋषि अपने 12 साल के भाई को बचाने के लिए कूदा पर  भाई को बचाकर ख़ुद इस अबूझ  प्रवाह में खो गया। सिवनी संगम की धर्मशाला उसकी कहानी सुनाती है और नर्मदा यहाँ न जाने क्यों बहुत खामोश रहती  है .......      अशोक जमनानी


 
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