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सोमवार, दिसंबर 01, 2014

नर्मदा यात्रा : 10 : डिण्डोरी






            
नर्मदा यात्रा : 10 : डिण्डोरी

























रामघाट के सौंदर्य को चित्त  हमेशा लिए सहेज लेता है और हम आगे बढ़ते हैं तो नर्मदा के किनारे बसा पहला नगर आता है - डिण्डोरी।  छोटा से शहर ने  जब नर्मदा के दोनों ओर अपना विस्तार किया होगा तो  नर्मदा भी प्रसन्न ही हुई होगी।  लेकिन अपने देश में जब नदियों के किनारे शहर बसते हैं तो वे नदियों के हत्यारे बन जाते हैं। डिण्डोरी भी इसी कोशिश में शामिल है। शहर की तमाम गंदगी बड़े नालों में आती है और वे नाले नर्मदा में आकर मिलते हैं। और बाकी शहरों की तरह डिण्डोरी भी पूरी निर्लज्जता के साथ हर  हर नर्मदे का उद्घोष करता है। मत्स्य पुराण नर्मदा का माहात्म्य बखानते हुए कहता है ग्रामे वा यदि वाSरण्ये पुण्या सर्वत्र नर्मदा। गाँव में हो या जंगल में हो नर्मदा हर जगह पुण्या है। लेकिन गांव और जंगल में पुण्या रहने वाली नर्मदा के लिए नगर में पुण्या होने  का दावा हज़ारों वर्ष पूर्व के ऋषि भी नहीं कर पाये। शायद वे जानते थे कि हम नगर में नर्मदा को पुण्या नहीं रहने देंगे  … हम नगर में किसी नदी को पुण्या नहीं रहने देंगे   …… अशोक जमनानी     

 
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