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शुक्रवार, दिसंबर 12, 2014

नर्मदा यात्रा : 13 : रामपुरी








    
नर्मदा यात्रा : 13 : रामपुरी




















जोगी टिकरिया से आगे चलकर रामपुरी में नर्मदा आश्चर्यजनक रूप से बहुत क्षीण धारा में बदल जातीं हैं। नर्मदा के साथ चलते जंगल और सहायक नदियां नर्मदा की धारा को पुष्ट करते हैं लेकिन रमपुरी में दोनों ओर मैदानों का विस्तार है। रमपुरी में नर्मदा का सीमित विस्तार देखकर थोड़ा-सा दुःख हुआ लेकिन फिर कई बरस पहले सुना एक लोकगीत याद आया  ....
नर्मदा की तो एकई सी महिमा रे
एकई सी महिमा
जैसे हंडिया है तैसई भेड़ाघाट रे  …
जीवन भी ऐसा ही है, कभी मुट्ठी भर और कभी आकाश से अधिक
हम जो बात नहीं  समझते, वो नर्मदा समझाती है और फिर जीवन को समझने वाला कोई लोक स्वर उसे बखानता भी है  …


- अशोक जमनानी    

 
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