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बुधवार, दिसंबर 17, 2014

नर्मदा यात्रा : 16 : सिद्धो-मालपुर- कन्हैया संगम



नर्मदा यात्रा : 16 : सिद्धो-मालपुर- कन्हैया संगम  







खरमेर संगम का दृश्य कुछ ओझल होता ही है कि एक और संगम मन को बांध लेता है। दक्षिण तट पर एक छोटा-सा गांव है- सिद्धो, और उत्तर तट पर है - मालपुर। इन दोनों के बीच बहती नर्मदा में कन्हैया आकर मिलती है या कहूँ मिलता है क्योंकि नाम से तो कन्हैया नदी नहीं नद ही हुआ जैसे नर्मदा के उद्गम के पास से निकलने वाला सोन, नदी नहीं नद है। बहुत प्रसिद्ध कहानी है कि नर्मदा और सोन का विवाह होने वाला था। लेकिन बस कुछ देर के लिए सोन नर्मदा की दासी जुहिला पर मोहित हुआ तो नर्मदा उसे ठोकर मारकर विपरीत दिशा में चल पड़ी और सदा कुंवारी रही। सोन को ठुकराने वाली नर्मदा अनेक नद-नदियों को अपने भीतर समाहित कर लेती है। नर्मदा ने सबको शरण दी पर फिर भी अकेली रही। जिसमें सब कुछ समाहित वो विराट चिर एकाकी, चिर प्रसन्न, सदा सर्वदा नर्म दा  ……

- अशोक जमनानी         

 
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