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बुधवार, दिसंबर 24, 2014

नर्मदा यात्रा : 22 : महाराजपुर- बंजर संगम

नर्मदा यात्रा : 22 : महाराजपुर- बंजर संगम 


रामनगर में इतिहास के पन्नों को खुला छोड़कर नर्मदा आगे बढ़ती है तो महाराजपुर ( मंडला ) पहुंचने से पहले बंजर नदी नर्मदा में आकर मिलती है। किसी  नगर के पास नदी की जो दुर्गति होती है वही गति नर्मदा की बंजर संगम पर दिखी। कचरे और दुर्गंध ने इतना विचलित किया कि बहुत तस्वीरें लेने का भी मन नहीं रहा। कई वर्ष पूर्व मैथिलीशरण गुप्त जी की सुप्रसिद्ध कृति 'साकेत' पढ़ी थी उसमे राम के वन  जाने पर वनवासी उनसे कहते हैं ' हमें नागर बनाओ तुम ' वनवासियों का नागर बनने का आग्रह इसलिए महत्वपूर्ण है क्योंकि शायद कभी नगर सभ्यता के केंद्र रहे होंगे लेकिन साफ़ सुथरे वनग्रामों को देखने के बाद जब नर्मदा तट के नगर देखता हूँ तो असभ्य आचरण को मूर्तिमान पाता हूँ। बार-बार यही सोचता सोचता हूँ कि आज गुप्त जी होते तो क्या वे लिख पाते " हमें नागर बनाओ तुम "       
 
- अशोक जमनानी     
 
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