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शनिवार, दिसंबर 27, 2014

नर्मदा यात्रा : 25 : फूलसागर- चिरई डोंगरी


नर्मदा  यात्रा : 25 : फूलसागर- चिरई डोंगरी




मंडला की तरह ही फूलसागर और चिरई डोंगरी नर्मदा के उत्तर तट पर हैं। हम अब बरगी की ओर बढ़ रहे हैं जहाँ नर्मदा पर पहला बड़ा बाँध है और इस बाँध के कारण नर्मदा के स्वरूप में बहुत बड़ा परिवर्तन घटित होता है। अमरकंटक से लेकर मंडला तक नर्मदा का प्रवाह अबाधित है इसलिए नर्मदा इस यात्रा में सौंदर्य का अद्भुत संसार रचती है लेकिन सहस्त्रधारा से बरगी का  जल संग्रहण  क्षेत्र शुरू होता है और नर्मदा एक लगभग ठहरे हुए प्रवाह वाली झील में बदल जाती है । बरगी से आगे चलकर भी नर्मदा का प्रवाह बहुत कम स्थानों पर रूप में  वैविध्य सृजन का मन बनाता है। किनारे रूप बदलते हैं लेकिन भेड़ाघाट से हंडिया तक की लगभग 350 किलोमीटर की दूरी में नर्मदा ठहरे-ठहरे से प्रवाह के साथ आगे बढ़ती है। हंडिया से इंदिरा सागर बाँध का  जल संग्रहण क्षेत्र शुरू होता है उसके बाद ओंकारेश्वर और महेश्वर बाँध का और अंत में सरदार सरोवर का। नर्मदा सहस्त्र धारा के बाद कभी अपने मौलिक रूप में नहीं रह पाती है। बांधों ने मध्यप्रदेश के विकास में बहुत बड़ी भूमिका निभायी है लेकिन हमने कीमत भी बहुत चुकायी है। फूलसागर और चिरई डोंगरी छोटे कस्बे हैं । शाम ढलती है तो नर्मदा के ठहरे प्रवाह के पास  परिंदे पेड़ों पर लौट आते हैं लेकिन मेरा मन  न जाने क्यों कह रहा था  … सोन चिरैया उड़ गई रे SSSS  ……

- अशोक जमनानी         
 

 
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