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शनिवार, जनवरी 03, 2015

नर्मदा यात्रा : 31 : सालीवाड़ा


नर्मदा यात्रा : 31 : सालीवाड़ा  



   बरगी  क्षेत्र के गाँवों से जुड़े बहुत से अनुभव हैं।  लेकिन यात्रा को आगे बढ़ाना है इसलिए सालीवाड़ा में कुछ देर रुककर आगे चलेंगे। इस छोटे से गाँव तक पहुंचते-पहुंचते बहुत से लोगों की दर्द और गुस्से से भरी बातें सुन चुका था । मन क्लांत था लेकिन सालीवाड़ा के पास एक ऊंचे टीले पर बेफ़िक्र बच्चों को सूर्यास्त के वक़्त पतंग उड़ाते देखा तो मुस्कराहट से राबिता हो चला। नर्मदा के  असीम विस्तार से जुड़े टीलों पर वे बच्चे कितने खुश थे । सूर्य को पतंग भी कहते हैं। आसमान में पतंग डूब रहा था पर बच्चों की पतंग आसमान की ओर बढ़ रही थी। आज जब इस वर्ष का सूर्यास्त हो रहा है तब नई पीढ़ी से जुड़ी नई उम्मीदों को आसमान की ओर बढ़ते देखना चाहता हूँ और यह भी चाहता हूँ कि वे तरक्की की जो दास्तां लिखें वो दास्तां चंद  लोगों की न होकर सबकी हो  ..... सबकी ....  अशोक जमनानी   

 
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