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मंगलवार, जनवरी 06, 2015

नर्मदा यात्रा : 35 : तिलवारा - तेवर




नर्मदा यात्रा : 35 : तिलवारा - तेवर








ग्वारी घाट से आगे बढ़कर नर्मदा  तिलवारा घाट पहुंचती है। उत्तर तट पर मुख्य घाट है और दक्षिण तट पर एक छोटा-सा घाट है। नगर से जुड़े घाटों की जो स्थिति अन्य स्थानों पर है वही स्थिति तिलवारा घाट की भी है। गंदगी और अतिक्रमण से जूझता घाट नर्मदा की लगभग बेजान धारा के साथ जैसे तैसे दिन काट रहा है शायद कभी इसके दिन बदलें। वैसे इस क्षेत्र ने दिनों का हेर-फेर कई बार देखा है। यहाँ से कुछ दूरी पर है तेवर गाँव। कभी यह छोटा-सा गांव पुराणों में वर्णित और बाद में  मध्यप्रदेश के इतिहास के बहुत महत्वपूर्ण कलचुरि राजवंश की राजधानी; त्रिपुरी था। अब इस गाँव को देखकर कोई नहीं कह सकता कि यह स्थान कई सदियों तक इस देश का एक बहुत महत्वपूर्ण नगर था। इतिहास और पौराणिक काल से भी पहले यह स्थान बेहद महत्वपूर्ण घटनाओं का साक्षी रहा है। कभी यहाँ डायनोसोर रहा करते थे। वैज्ञानिकों ने इस क्षेत्र के डायनोसोर को नाम दिया है - नर्मदेसिस राजासोरस। अब डायनोसोर नहीं हैं। पुराणों और इतिहास की प्रसिद्ध नगरी त्रिपुरी भी नहीं है पर नर्मदा अब भी बहती है ....  कई कथाएँ कहती है  .......


- अशोक जमनानी  

 
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